Saturday, October 20, 2012

माँ का आव्हान


माँ की जैजैकार करना भी
सिखलाया है जिसने
वह क्या
माँ से भी बढ़कर है?

प्रश्न सुन कर
खिलखिलाए वह
कह बैठे

'छोरा, तू तो भोंदू का भोंदू ही रहा
तुलना करता है ऐसे
यानि अब भी मानता है
माँ से अलग भी कुछ है'

2

माँ का आव्हान करना है बेटा
जाग्रत करना है माँ को
यह जो सांस का आना जाना है न
ये माँ का ही संगीत है
यह जो प्रकट करते हो स्वयं को
शब्द लेकर

यह जो सम्बन्ध है न
शब्द का अर्थ से
इसमें माँ का दरसन नहीं होते तुम्हें?




अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
20 अक्टूबर 2012



1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

बहुत ही सुन्दर..

कविता

कविता न नारा न विज्ञापन कविता सत्य खोजता मेरा मन कविता न दर्शन न प्रदर्शन कविता अनंत से खेलता बचपन कव...