Friday, October 21, 2011

दीप उत्सव का मंगल गान


दीप उत्सव का मंगल गान
आस्था का ज्योतिर्मय आव्हान

बने वैभवशाली
पायें खुशहाली
समन्वय की बजे ताली
आनंद बढ़ाये दीवाली

रामजी के घर लौटने का मर्म
स्वयं से सर्वोत्तम की पहचान है
उजियारे का ये उमंग भरा पर्व
 सपने साकार करने का आव्हान है

मन का मधुर प्रेम से करे श्रृंगार
 हर स्थिति का आस से हो सत्कार
खनक रही है उत्साह की झंकार
दीपोत्सव पर ज्योतिर्मय नमस्कार


अशोक व्यास 

2 comments:

संगीता पुरी said...

मन का मधुर प्रेम से करे श्रृंगार
हर स्थिति का आस से हो सत्कार
खनक रही है उत्साह की झंकार
दीपोत्सव पर ज्योतिर्मय नमस्कार

बहुत सुंदर गीत !!

प्रवीण पाण्डेय said...

दीवाली की शुभकामनायें।

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...