Thursday, October 13, 2011

ये चक्र


कितनी बार देखा है ये चक्र
कर्म
संतोष
अपेक्षा
जड़ता
छटपटाहट 
आलोडन विलोडन
मंथन

तिनके उठा कर
फिर से
अपेक्षा रहित होकर
गति की लय अपनाना
कर्म में जुट जाना
रिस रिस कर आते संतोष का स्वाद लेकर
तृप्त हो जाना




अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
१३ अक्टूबर २०११                 

आनंदित निर्झर

छम छम बरसे प्रेमामृत सा खिला करूण अलोक अपरिमित मौन मधुर झीना झीना सा सरस सूक्ष्म  आनंदित निर्झर तन्मय बेसुध  लीन....  ...