Monday, August 29, 2011

प्यार भरा विश्वास

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कभी-कभी 
 कर लेना चाहता 
अपनी स्थिति का आंकलन,
ना जाने क्यूं
   परिचय हो जाता अपना 
  सीमाओं का बंधन,

(फोटो- अशोक व्यास)


 कभी- कभी
  गले में बाँहें डाल कर
यूँ बोलता  आकाश 
  है तुम्हारे भीतर
 मेरे जितना 
प्यार भरा विश्वास,

 कभी कभी 
छुडा कर धरा
गोद में ले उडाती है पवन,
हर दिशा को
 देख-समझ 
  अनंत को कर लेता नमन,


अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
२९ अगस्त २०११   



 

4 comments:

वन्दना said...

बस यही विश्वास बना रहना चाहिये।

प्रवीण पाण्डेय said...

विशालता का विश्वास आकाश से मिलता है।

अनुपमा त्रिपाठी... said...

परिचय हो जाता अपना
सीमाओं का बंधन,
इस सीमा की पहचान ही बहुत मुश्किल से होती है ...कहीं न कहीं कोई न कोई सीमा हमें बंधे ही रखती है ...सुंदर चित्र और सुंदर अभिव्यक्ति...

अरूण साथी said...

सुन्दर अहसास

आनंदित निर्झर

छम छम बरसे प्रेमामृत सा खिला करूण अलोक अपरिमित मौन मधुर झीना झीना सा सरस सूक्ष्म  आनंदित निर्झर तन्मय बेसुध  लीन....  ...