Tuesday, August 23, 2011

अपनापन



पकड़ नहीं सकते
 धूप को शिशु अवस्था में
चढ़ ही जाता है यौवन,
  उमड़ ही आती हैं 
गति की लहरें
  बदल ही जाता बचपन,

  कैसे होता है तय
  रंग कौन से
 सजें हमारे आँगन,
   चाहे जो हो
 सार सुलभ करता है 
 केवल अपनापन

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
२३ अगस्त 2011 


 

2 comments:

Rakesh Kumar said...

चाहे जो हो
सार सुलभ करता है
केवल अपनापन

मेरा-तेरा बहुत है,पर अपनापन ही कठिन है.
अपनापन असली प्रभु कृपा है.

Rakesh Kumar said...

चाहे जो हो
सार सुलभ करता है
केवल अपनापन

मेरा-तेरा बहुत है,पर अपनापन ही कठिन है.
अपनापन असली प्रभु कृपा है.

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