Saturday, February 19, 2011

सूर्य की उजियारी गोद




अभिव्यक्ति की छटपटाहट नहीं
उछलन है
आनंद की रसमय धारा का
शब्दों का हाथ पकड़ कर
धर रही है
उनकी हथेली पर
अपने कुछ चिन्ह
खेल खेल में


सूर्य की उजियारी गोद 
बैठ कर 
सुरक्षित मोद में       
अब बाँट लेना चाहता हूँ
तुम्हारे साथ
यह
स्वर्णिम मौन



अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
शनिवार, १९ फरवरी २०११      

1 comment:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सूर्य की उजियारी गोद
बैठ कर सुरक्षित मोद में
अब बाँट लेना चाहता हूँ
तुम्हारे साथयह
स्वर्णिम मौन

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति

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