Wednesday, September 22, 2010

अमिट आश्वस्ति

 
शुद्ध भाव के बिना
कैसे मिले
शुद्ध प्रसन्नता

शुद्ध प्रसन्नता के बिना
कैसे जगमगाए
सतत आनंद

सतत आनंद के बिना
कैसे स्थिर हो
अमिट आश्वस्ति

अमिट आश्वस्ति
अर्जित करने और सहेजने
क्या करूँ
कैसे करूँ

प्रश्न लेकर
पहुंचता हूँ जब 
परम पिता के द्वार पर
मांगता है
वो
मुझसे शुद्ध भाव


अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
२२ सितम्बर २०१०

1 comment:

प्रवीण पाण्डेय said...

सभी प्रश्नों के उत्तर शुद्ध भाव में ही छिपे हैं।

वहाँ जो मौन है सुंदर

वह जो लिखता लिखाता है कहाँ से हमारे भीतर आता है कभी अपना चेहरा बनाता कभी अपना चेहरा छुपाता है वह जो है शक्ति प्रदाता  ...