Thursday, August 19, 2010

अपूर्णता का उपहार देकर



नया लिखने के लिए 
साहस और सृजनशीलता चाहिए
तब
जब
आप सच लिखना चाहें
और प्रस्तुत हों अनावृत होने के लिए
 
२ 
नया लिखना तब संभव है 
जब आप अंदरुनी तौर पर
शब्दों के साथ
गढे जाने को तैयार हों
एक कोई है जो
अनगढ़ा बनाए रखता है
निरंतर हमें 

शेष रह जाता है
'कहीं कुछ'
जिससे और परिष्कृत हो सकते हम
इस तरह
नए नए ढंग से 
अपूर्णता का उपहार देकर
 बनाए रखता है वो 
हमारी सृजनशीलता
 
अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका
गुरुवार, १९ अगस्त २०१०



2 comments:

वन्दना said...

इस तरह
नए नए ढंग से
अपूर्णता का उपहार देकर
बनाए रखता है वो
हमारी सृजनशीलता

बिल्कुल सही कहा ………वरना इंसान मे वो शक्ति कहाँ।

प्रवीण पाण्डेय said...

कितना कुछ माँगती है सृजनशीलता।

कविता

कविता न नारा न विज्ञापन कविता सत्य खोजता मेरा मन कविता न दर्शन न प्रदर्शन कविता अनंत से खेलता बचपन कव...