![]() |
कविता की परिधि में
सब कुछ है यदि
तो
मैं कविता के घेरे से बाहर
इस अज्ञात स्थल पर
पहुँच जाता कैसे ?
२
सृजनशीलता का द्वार
खुलता तो होगा
मुझ में ही कहीं
पर
बंद अपने लिए
इस तरह अचानक
हो जाता कैसे ?
३
तेज़ बारिश में
टूट टूट कर पेड़ से
रेत में आ गिरे
नन्हे तिनके
पेड़ से अपना रिश्ता
निभाते हैं कैसे?
४
हर बार
नए सिरे से
पहचान का स्पर्श
नयनों में जाग्रत करने वाला
जो है
क्या वो भी
अपनी पहचान का पता
भूल सकता है ऐसे?
अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
सुबह ७ बज कर ३५ मिनट
सोमवार, २४ मई २०१०
No comments:
Post a Comment