Friday, February 17, 2017

पिंजरा














 पिंजरा

 पिंजरा खुला हो 
तब भी 
ऐसा होता है साहिबान 
घेरे का पंछी 
निकल कर 
नहीं भरता उड़ान 

सींकचों में घिरे रहना 
उसे  सुरक्षा कवच सा लगता है 
हम ऐसे पंछी जिन्हें 
रिश्तों का रस्सा सच सा लगता है 

अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 
१७ फरवरी २०१७ 


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