Saturday, May 14, 2016

मजे में हूँ




१ 
धूप आई 
झकाझक 
सुन्दर हो गया 
सब कुछ 
उजाले ने गुदगुदा कर 
मुझसे छीन लिया 
गीत मेरी विवशता का 

२ 

आँख मूँद 
तैरते हुए 
शांत जल पर 
पीठ के बल 
मैं ने हंस कर कहा 
किरण से 'मजे में हूँ'


अशोक व्यास 


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