Friday, February 26, 2016

अभी तो शुरु हुआ है मंथन




क्या टिप्प्पणी करें उसके वाक् चातुर्य के कमाल पर 

ले गया वो हमारी आँख से काजल निकाल कर 

 

फिर उसी काजल से अपना चेहरा किया काला 

 हमारे खिलाफ उसने मुक़्क़दमा कर डाला

 

हैरत से देख रहे हैं उसका अंदाज़ शातिराना 

एक हमलावर का संसद में सहानुभूति पाना 

 

बात अच्छी लगे ऐसी तो ताली मत बजाना 

अपनी सतर्कता बढ़ा कर स्वयं को बचाना 

 

देख बौद्धिक अंधेपन की प्रतिष्ठा समाज में 

ऐसे किसी अज्ञानी के झांसे में मत आ जाना 

 

अभी तो शुरु हुआ है मंथन 

अमृत नहीं प्रकटेगा दनादन 

 

पहले अवांछित पदार्थ आएंगे, मत घबराना 

भारत की माटी में श्रद्धा रखना, विजय पाना 

 

अशोक व्यास 

न्यूयार्क, अमेरिका 

२६ फरवरी २०१६

 

 
 

No comments:

कविता

कविता न नारा न विज्ञापन कविता सत्य खोजता मेरा मन कविता न दर्शन न प्रदर्शन कविता अनंत से खेलता बचपन कव...