Saturday, January 9, 2016

और एक बार सही



याद को सहलायें 
दिल को बहलायें 

याद को छू लें ऐसे 
कि ये पल जगमगायें 

देख कर उनकी हंसी 
हम भी कुछ मुस्कराएँ 

और एक बार सही 
खुद को ऐसे समझायें 

 जो याद रहें हैं हमेशा 
 वो कभी मिटने न पायें 

पर जो नहीं है यहाँ 
उसे अब कहाँ से लायें 

अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका 
जनवरी ९,  २०१५ 



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