Friday, February 6, 2015

जहाँ छम छम है प्रेम की


सुर समय के क्या सुनाते हैं 
हम भले समझ नहीं पाते हैं 

समन्वय की आस्था लेकर 
इतना तो जान पाते हैं 

जहाँ छम छम है प्रेम की 
बस वहां ठहर जाते हैं 

लोग वैलेंटाइन पर 'आई लव यू ' कहते हैं 
हम 'जय श्री कृष्ण' कह कर मुस्कुराते हैं 

-अशोक व्यास 


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आनंदित निर्झर

छम छम बरसे प्रेमामृत सा खिला करूण अलोक अपरिमित मौन मधुर झीना झीना सा सरस सूक्ष्म  आनंदित निर्झर तन्मय बेसुध  लीन....  ...