Tuesday, January 3, 2017

सार सज्जित आव्हान



जीवन वह नहीं
जो मिला है
जीवन वह है
जो तुम बनाते हो

सच बात है

तुम पैदाइशी निर्माता हो
 अपने भाग्य विधाता हो

तुम ही संकट कारक
तुम ही आनंद प्रदाता हो



तुम वह नहीं
जो दीखते हो
वो नाम नहीं
जो लिखते हो

सच बात है

तुम जन्म से ही विराट हो
काल से परे का ठाट हो

चाहो तो बनो बंदी भी
वैसे तो तुम सम्राट हो


तुम मंगल मुस्कान हो
सांस सूत्र की शान हो
अपने भीतर अनंत का
सार सज्जित आव्हान हो

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
३ जनवरी २०१७




आनंदित निर्झर

छम छम बरसे प्रेमामृत सा खिला करूण अलोक अपरिमित मौन मधुर झीना झीना सा सरस सूक्ष्म  आनंदित निर्झर तन्मय बेसुध  लीन....  ...